गुरुवार, 19 नवंबर 2020

दीनदयाल रसोई द्वितीय चरण की अनुश्रवण समिति की बैठक संपन्न

 कलेक्टर श्री संजय कुमार की अध्यक्षता में आज बुधवार को  मध्य प्रदेश शासन द्वारा दीनदयाल रसोई द्वितीय चरण की अनुश्रवण समिति की प्रथम बैठक का आयोजन संपन्न हुआ। जिसमें योजना के संबंध में सभी सदस्यों को 15 सितम्बर 2020 के आदेश के संबंध में जानकारी दी गई। बैठक में कलेक्टर ने खाद्य अधिकारी केा निर्देशित किया कि रसोई संचालन के दौरान खाद्य विभाग निर्धारित दर पर गेहॅू, चावल उपलब्ध कराने की आवश्यक तैयारी कर लें। 

    कलेक्टर श्री कुमार ने महाप्रबंधक जिला उद्योग दतिया को सामाजिक दायित्व निधि के तहत संस्था को आवश्यक फंड उपलब्ध कराने की कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य नगरपालिका अधिकारी दतिया केा आवश्यक मूलभूत व्यवस्थाओं के संबंध में कार्यवाही करने एवं प्रति सप्ताह कार्यवाही उपरांत अवगत कराने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने परियोजना अधिकारी संस्था को टेंडर प्रक्रिया एवं द्वितीय बैठक शीघ्र ही रखने एवं दिसम्बर के प्रथम सप्ताह में हरहाल में शासन मंशानुसार दीनदयाल रसोई का संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिससे नगर में आने-जाने वाले प्रत्येक गरीब केा सस्ती दर पर भोजन उपलब्ध हो सके।
   बैठक में परियेाजना अधिकारी एवं सदस्य सचिव श्री राघवेन्द्र सिंह पालिया, नगर पालिका अधिकारी श्री अनिल कुमार दुवे, महाप्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र श्री जीडी पाराशर, सिटी मेनेजर एनयूएलएम दतिया श्री राजन श्रीवास्वत उपस्थित थे।

कलेक्टर ने उपार्जन केन्द्रों पर जांच हेतु अधिकारियों केा किया नियुक्त

 कलेक्टर श्री संजय कुमार ने आदेश जारी कर उपार्जन केन्द्रों पर जांच करने हेतु अधिकारियेां को नियुक्त किया है। उन्होंने निर्देश देते हुए अधिकारियों से कहा है कि जिसमें अधिकारी सभी खरीदी केन्द्रों पर आज दिनांक तक खरीदी की विवरण रिपोर्ट देंगे एवं किस किसान से खरीदी की गई है उसका पंजीयन कितने रकवा का हुआ एवं उस रकवे पर बोई फसल का सत्यापन करेंगे। उपार्जन केन्द्र पर खरीदी की गई है वह इस वर्ष की है पिछले वर्ष की है इसका सत्यापन करेंगे। जिले के बाहर अथवा किसी व्यापारी के द्वारा उपार्जन केन्द्र पर फसल तो नहीं बेची गई है उसका सत्यापन करें। प्रति खरीदी केन्द्र की जांच कर स्पष्ट रिपोर्ट देंवे की किस खरीदी पर त्रुटि हुई है। किसी खरीदी पर गड़बड़ पाए जाने की आंशका होने पर माल जब्ती की कार्यवाही भी करना सुनिश्चित करेंगे। 

    उपार्जन केन्द्रों पर जिन अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई उनमें सेवा सहकारी समिति छिकाऊ, सेवा सहकारी समिति भलका, सेवा सहकारी समिति इंदरगढ़, भवानी मार्केटिंग संस्था इंदरगढ़ (सेवढ़ा) में श्री सुनील वर्मा, सेवा सहकारी समिति सेनगुआ, सेवा सहकारी समिति ररूआजीवन एवं सेवा सहकारी समिति टोडा में श्री सुनील भदौरिया, कृषि साख सहकारी समिति तरगुवॉ में श्री दीपक यादव, सेवा सहकारी समिति कुम्हेड़ी, सेवा सहकारी समिति बडेरा पचोखरा में श्री नीतेश भार्गव, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति इकारा मुख्यालय इकारा, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति गंधारी में सुश्री शालिनी भार्गव, सेवा सहकारी समिति सालोन ए, सेवा सहकारी समिति भलका, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति गोंदन श्री अजय परसेंडिया, कृषि साख सहकारी समिति इमलिया पंडोखर श्री राधाबल्लभ धाकड़, सेवा सहकारी समिति सोहन, सेवा सहकारी समिति सिंहपुरा भाण्डेर, सेवा सहकारी समिति पंडोखर में श्री सूर्यकांत त्रिपाठी, सेवा सहकारी समिति चंदरोल में श्री शिवशंकर गुर्जर, कृषि साख सहकारी समिति हिनोतिया, कृषि साख सहकारी समिति कुरथरा, सेवा सहकारी समिति बड़ोनीखुर्द में सुश्री मोहिनी साहू, सेवा सहकारी समिति थरेट में श्रीमती कल्पना कुशवाह एवं कृषि साख सहकारी समिति भगुआपुरा श्री साहिर खान की ड्यूटी लगाई गई है। 

कार्यालयों में समय पर उपस्थित न होने वाले शासकीय कर्मियों पर होगी कार्यवाही

 दतिया जिले के सभी कार्यालयों में कार्यरत शासकीय कर्मी अपने-अपने कार्यालयों में प्रातः 10.30 बजे उपस्थित होकर अपना कार्यालयीन कार्य शुरू करेंगे। ऐसे शासकीय कर्मी जो प्रातः 10.30 बजे अपने कार्यालय में अनुपस्थित पाए जाने पर उनके विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी। 

    कलेक्टर श्री संजय कुमार ने जिले में स्थित सभी शासकीय कार्यालयों में कार्यरत अधिकारी एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे कार्यालयों में कार्यालय समय प्रातः 10.30 बजे उपस्थित होकर अपना कार्य सुचारू रूप से संपादित करेंगे। सही समय पर उपस्थित न होने वाले शासकीय सेवकों के विरूद्व कार्यवाही की जाएगी। कलेक्टर ने कार्यालयों में कर्मचारियों केा समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु उनके एवं प्रतिनिधि द्वारा प्रतिदिन किसी एक कार्यालय का प्रातः 10.30 बजे निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान उपस्थित पंजी का भी प्रातः 10.45 बजे उनके समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। कलेक्टर ने सभी कार्यालय प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे सुनिश्चित करें की कि उनके अधीनस्थ सभी अधिकारी एवं कर्मचारी अपने-अपने कार्यालय में प्रातः 10.30 बजे उपस्थित हों। अन्यथा अनुपस्थित पाए जाने पर संबंधित के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी।  

कलेक्टर ने किया स्थानीय निर्वाचन ईव्हीएम वेयर हाउस का निरीक्षण

 

 कलेक्टर श्री संजय कुमार ने पुरानी कलेक्ट्रेट भवन में स्थापित स्थानीय निर्वाचन ईव्हीएम वेयर हाउस का निरीक्षण किया। उन्होंने एफएलसी एवं नोडल अधिकारी पीडब्लूडी एवं अन्य निर्वाचन कार्य से जुड़े संबंधित अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं दुरूस्त कराने के निर्देश दिए। उन्होंने ईव्हीएम मशीनों की जांच कर तैयार करने के निर्देश दिए। इस दौरान संबंधित सभी अधिकारी उपस्थित थे। 

बुधवार, 18 नवंबर 2020

सहकारिता से साकार होगा आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश व लोकल के लिए वोकल का सपना

 भारतीय संस्कृति का मूल भाव है "सर्वे भवन्तु सुखिन:" तथा "वसुधैव कुटुम्बकम्" और यही भाव सहकारिता का भी है। सहकारिता भारत की मौलिक सोच है, यह कहीं से आयातित विचार नहीं है। यही कारण है कि भारत के जन-मानस में, खासतौर पर किसानों, पशुपालकों, स्व-सहायता समूहों आदि को सहकारिता मॉडल सर्वथा योग्य लगता है। व्यक्ति पीछे रहे और विचार आगे बढ़ें, स्वार्थ पीछे रहे और साथी आगे बढ़े, यही सहकारिता की असली ताकत है।

   मध्यप्रदेश सरकार ने सहकारिता आंदोलन के प्रति अपनी अनुकूल नीतियों और पिछले 15 वर्षों में लाभप्रद कृषि योजनाओं के माध्यम से प्रदेश को अधिशेष खाद्यान्न उत्पादन राज्य बनाया, जिसके कारण ही विगत 5 वर्षों से मध्यप्रदेश को भारत सरकार से लगातार कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त होते रहे। प्रदेश सरकार ने हमेशा कृषि के विकास तथा किसानों के कल्याण पर ध्यान केन्द्रित किया है। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आव्हान पर "आत्मनिर्भर भारत" की तर्ज पर राज्य ने "आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश" के रोडमेप में "लोकल के लिये वोकल" को मूर्त रूप देना प्रारंभ कर दिया है।
   कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर प्रदेश बनाने के लिये वर्तमान और भविष्य के लिये कई महत्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं, जैसे उत्पादन लागत के अनुपात में आय और लाभ को बढ़ाना, आदानों की लागत में कमी करना, जल, मिट्टी व जैव-विविधता में हो रहे नुकसान को कम करना, सस्ती फार्म मशीनरी की उपलब्धता को सुनिश्चित करना, दक्ष, सस्ती और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ कृषि पद्धतियाँ विकसित करना, छोटे और सीमांत किसानों के लिये सस्ती, सुलभ एवं कम ऊर्जा खपत वाली सुगम तकनीकी विकसित करना, मानव श्रम को आसान बनाने वाली फार्म मशीनरी और तकनीकी को विकसित करना, मूल्य संवर्धन की नवीन तकनीकी एवं उत्पाद को विकसित करना।
   मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रदेश सरकार इन चुनौतियों से निपटने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रदेश में लघु एवं सीमांत कृषक केन्द्रित अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिये राज्य सहकारी बैंक के स्तर पर "केपिटल फण्ड" स्थापित किया जायेगा। इस फण्ड के माध्यम से कृषि तकनीकों के नये अनुसंधान को पेटेंट कराया जायेगा और व्यावसायिक उत्पादन करने हेतु उद्यमियों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जायेगी। लघु एवं सीमांत कृषकों को मजबूत बनाने के लिये एपेक्स बैंक के माध्यम से एक "वैंचर केपिटल फण्ड" स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। यह वैंचर केपिटल फण्ड एक प्रकार का वित्त पोषण होगा, जिसमें एपेक्स बैंक लघु और सीमांत किसानों के लिये सहायक नवाचारकर्ताओं, फेब्रिकेटर, शोधकर्ताओं और अनुसंधान संगठनों, स्टार्ट-अप कम्पनियों के माध्यम से विकसित किये गये उपकरण, प्रौद्योगिकी और कृषि पद्धतियों के अनुसंधान, नवाचारों और वाणिज्यिक उत्पादन के लिये वित्तीय सहयोग प्रदान करेगा। यह फण्ड नवाचारों के पेटेंट में भी सहयोग करेगा।
प्रदेश में 38 जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक एवं उनसे संबद्ध 4,523 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियाँ हैं। इन समितियों से लगभग 75 लाख किसान जुड़े हुए हैं। प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को ग्रामीण क्षेत्रों में जन-सामान्य को विभिन्न सेवाओं का प्रदाय करने हेतु पारदर्शी, जवाबदेह, विश्वसनीय तथा प्रभावी सिंगल प्वाइंट ऑफ सर्विस डिलेवरी चैनल के रूप में विकसित करने की कार्यवाही प्रारंभ की गई है। इसके तहत प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को उनके रिकार्ड डिजिटाइजेशन के साथ सहकारी बैंकों की कोर-बैंकिंग के साथ जोड़ा जायेगा, ताकि सहकारी साख संस्थाओं के तीनों स्तरों में डाटा लिंकिंग के जरिये कार्य-प्रणाली में पारदर्शिता लायी जा सके और दक्षता को बढ़ाया जा सके। इस व्यवस्था से किसानों/समिति के सदस्यों को अन्य बैंकिंग संस्थाओं के समकक्ष आधुनिक बैंकिंग सुविधा के साथ बाधा-रहित इलेक्ट्रॉनिक पहुँच उपलब्ध हो सकेगी। इससे ऋण वितरण सहित बैंकिंग कार्य में होने वाली गड़बडि़यों को रोका जा सकेगा। परिणामस्वरूप समितियों के प्रति किसानों में विश्वास बढ़ेगा। इसके साथ ही समितियों को बैंकिंग की प्रभावी अंतिम कड़ी के रूप में विकसित करने में सफलता मिलेगी। शासकीय योजनाओं अंतर्गत ऋण व खाद वितरण, उपार्जन कार्य, खाद्यान्नों का विक्रय आदि के प्रबंधन हेतु विश्वसनीय अभिलेखीकरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
   यह भी प्रयास किया जा रहा है कि प्रदेश की सभी प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के कम्प्यूटराईजेशन का कार्य इस प्रकार कराया जाये, जिससे कि समितियों पर अनावश्यक वित्तीय भार न आये। सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद सिंह भदौरिया ने बताया कि राज्य शासन ने इस हेतु वर्ष 2020-21 के बजट में सहकारिता विभाग के लिये 20 करोड़ का प्रावधान रखा है। उन्होंने बताया कि हमारा यह प्रयास होगा कि इस कार्यवाही को एक समयबद्ध कार्य-योजना बनाकर पूर्ण किया जाये। सहकारी समितियों के पंजीयन की व्यवस्था को फेसलेस, पारदर्शी, डिजिटल एवं आम जनता के लिये सुगम व सुविधाजनक बनाया जा रहा है। सहकारिता विभाग की सेवाएँ भी लोक सेवा गारंटी के दायरे में लायी गई हैं।
   सहकारिता मंत्री डॉ. भदौरिया का मानना है कि सहकारिता हमारा जीवन-दर्शन है। हमारी सदियों पुरानी जीवन पद्धति है। पहले इसकी गतिविधियों का केन्द्र केवल ग्रामीण क्षेत्र हुआ करता था, लेकिन आज यह नगरीय सहकारी बैंकों के माध्यम से शहरों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। हरित-क्रांति हो या श्वेत-क्रांति या फिर नीली और पीली क्रांति, सभी की आत्मा में सहकारिता का वास है। सहकारी बैंकों एवं प्राथमिक कृषि साख समितियों के कार्यों में पारदर्शिता लाकर सहकारी आंदोलन को मजबूत बनायेंगे। प्रदेश के किसानों को आधुनिक बैंकिंग की सुविधा उपलब्ध कराते हुए "आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश" के निर्माण हेतु हरसंभव कार्यवाही करेंगे।
   प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश में भी इस दिशा में तेजी से प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्म-दिवस के उपलक्ष्य में राज्य में 17 से 23 सितम्बर तक मनाये गये गरीब कल्याण सप्ताह अन्तर्गत आयोजित कार्यक्रम में 63 हजार नवीन किसान, पशुपालक, मत्स्य-पालक हितग्राहियों को किसान क्रेडिट-कार्ड प्रदान किये। इन किसानों के लिये राज्य शासन द्वारा 335 करोड़ रुपये की साख सीमा भी स्वीकृत की गई। सहकारी समितियों द्वारा 36 हजार से अधिक किसानों को 122 करोड़ का ऋण वितरण भी किया गया। उन्होंने शून्य प्रतिशत ब्याज पर किसानों को ऋण उपलब्ध कराने के लिये 800 करोड़ रुपये की सहायता भी सहकारी बैंकों को प्रदान की।
   मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के कृषक हितग्राहियों को अतिरिक्त सहायता दिये जाने के लिये मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना शुरू की है। इस योजना में दो किश्तों में 4 हजार रुपये राज्य सरकार द्वारा किसानों को प्रदान किये जायेंगे। इस प्रकार किसानों को प्रतिवर्ष कुल 10 हजार रुपये की राशि प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में प्रदेश के 77 लाख हितग्राही किसान लाभान्वित होंगे।

सहकारिता से साकार होगा आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश व लोकल के लिए वोकल का सपना

 भारतीय संस्कृति का मूल भाव है "सर्वे भवन्तु सुखिन:" तथा "वसुधैव कुटुम्बकम्" और यही भाव सहकारिता का भी है। सहकारिता भारत की मौलिक सोच है, यह कहीं से आयातित विचार नहीं है। यही कारण है कि भारत के जन-मानस में, खासतौर पर किसानों, पशुपालकों, स्व-सहायता समूहों आदि को सहकारिता मॉडल सर्वथा योग्य लगता है। व्यक्ति पीछे रहे और विचार आगे बढ़ें, स्वार्थ पीछे रहे और साथी आगे बढ़े, यही सहकारिता की असली ताकत है।

   मध्यप्रदेश सरकार ने सहकारिता आंदोलन के प्रति अपनी अनुकूल नीतियों और पिछले 15 वर्षों में लाभप्रद कृषि योजनाओं के माध्यम से प्रदेश को अधिशेष खाद्यान्न उत्पादन राज्य बनाया, जिसके कारण ही विगत 5 वर्षों से मध्यप्रदेश को भारत सरकार से लगातार कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त होते रहे। प्रदेश सरकार ने हमेशा कृषि के विकास तथा किसानों के कल्याण पर ध्यान केन्द्रित किया है। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आव्हान पर "आत्मनिर्भर भारत" की तर्ज पर राज्य ने "आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश" के रोडमेप में "लोकल के लिये वोकल" को मूर्त रूप देना प्रारंभ कर दिया है।
   कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर प्रदेश बनाने के लिये वर्तमान और भविष्य के लिये कई महत्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं, जैसे उत्पादन लागत के अनुपात में आय और लाभ को बढ़ाना, आदानों की लागत में कमी करना, जल, मिट्टी व जैव-विविधता में हो रहे नुकसान को कम करना, सस्ती फार्म मशीनरी की उपलब्धता को सुनिश्चित करना, दक्ष, सस्ती और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ कृषि पद्धतियाँ विकसित करना, छोटे और सीमांत किसानों के लिये सस्ती, सुलभ एवं कम ऊर्जा खपत वाली सुगम तकनीकी विकसित करना, मानव श्रम को आसान बनाने वाली फार्म मशीनरी और तकनीकी को विकसित करना, मूल्य संवर्धन की नवीन तकनीकी एवं उत्पाद को विकसित करना।
   मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रदेश सरकार इन चुनौतियों से निपटने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रदेश में लघु एवं सीमांत कृषक केन्द्रित अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिये राज्य सहकारी बैंक के स्तर पर "केपिटल फण्ड" स्थापित किया जायेगा। इस फण्ड के माध्यम से कृषि तकनीकों के नये अनुसंधान को पेटेंट कराया जायेगा और व्यावसायिक उत्पादन करने हेतु उद्यमियों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जायेगी। लघु एवं सीमांत कृषकों को मजबूत बनाने के लिये एपेक्स बैंक के माध्यम से एक "वैंचर केपिटल फण्ड" स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। यह वैंचर केपिटल फण्ड एक प्रकार का वित्त पोषण होगा, जिसमें एपेक्स बैंक लघु और सीमांत किसानों के लिये सहायक नवाचारकर्ताओं, फेब्रिकेटर, शोधकर्ताओं और अनुसंधान संगठनों, स्टार्ट-अप कम्पनियों के माध्यम से विकसित किये गये उपकरण, प्रौद्योगिकी और कृषि पद्धतियों के अनुसंधान, नवाचारों और वाणिज्यिक उत्पादन के लिये वित्तीय सहयोग प्रदान करेगा। यह फण्ड नवाचारों के पेटेंट में भी सहयोग करेगा।
प्रदेश में 38 जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक एवं उनसे संबद्ध 4,523 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियाँ हैं। इन समितियों से लगभग 75 लाख किसान जुड़े हुए हैं। प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को ग्रामीण क्षेत्रों में जन-सामान्य को विभिन्न सेवाओं का प्रदाय करने हेतु पारदर्शी, जवाबदेह, विश्वसनीय तथा प्रभावी सिंगल प्वाइंट ऑफ सर्विस डिलेवरी चैनल के रूप में विकसित करने की कार्यवाही प्रारंभ की गई है। इसके तहत प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को उनके रिकार्ड डिजिटाइजेशन के साथ सहकारी बैंकों की कोर-बैंकिंग के साथ जोड़ा जायेगा, ताकि सहकारी साख संस्थाओं के तीनों स्तरों में डाटा लिंकिंग के जरिये कार्य-प्रणाली में पारदर्शिता लायी जा सके और दक्षता को बढ़ाया जा सके। इस व्यवस्था से किसानों/समिति के सदस्यों को अन्य बैंकिंग संस्थाओं के समकक्ष आधुनिक बैंकिंग सुविधा के साथ बाधा-रहित इलेक्ट्रॉनिक पहुँच उपलब्ध हो सकेगी। इससे ऋण वितरण सहित बैंकिंग कार्य में होने वाली गड़बडि़यों को रोका जा सकेगा। परिणामस्वरूप समितियों के प्रति किसानों में विश्वास बढ़ेगा। इसके साथ ही समितियों को बैंकिंग की प्रभावी अंतिम कड़ी के रूप में विकसित करने में सफलता मिलेगी। शासकीय योजनाओं अंतर्गत ऋण व खाद वितरण, उपार्जन कार्य, खाद्यान्नों का विक्रय आदि के प्रबंधन हेतु विश्वसनीय अभिलेखीकरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
   यह भी प्रयास किया जा रहा है कि प्रदेश की सभी प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के कम्प्यूटराईजेशन का कार्य इस प्रकार कराया जाये, जिससे कि समितियों पर अनावश्यक वित्तीय भार न आये। सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद सिंह भदौरिया ने बताया कि राज्य शासन ने इस हेतु वर्ष 2020-21 के बजट में सहकारिता विभाग के लिये 20 करोड़ का प्रावधान रखा है। उन्होंने बताया कि हमारा यह प्रयास होगा कि इस कार्यवाही को एक समयबद्ध कार्य-योजना बनाकर पूर्ण किया जाये। सहकारी समितियों के पंजीयन की व्यवस्था को फेसलेस, पारदर्शी, डिजिटल एवं आम जनता के लिये सुगम व सुविधाजनक बनाया जा रहा है। सहकारिता विभाग की सेवाएँ भी लोक सेवा गारंटी के दायरे में लायी गई हैं।
   सहकारिता मंत्री डॉ. भदौरिया का मानना है कि सहकारिता हमारा जीवन-दर्शन है। हमारी सदियों पुरानी जीवन पद्धति है। पहले इसकी गतिविधियों का केन्द्र केवल ग्रामीण क्षेत्र हुआ करता था, लेकिन आज यह नगरीय सहकारी बैंकों के माध्यम से शहरों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। हरित-क्रांति हो या श्वेत-क्रांति या फिर नीली और पीली क्रांति, सभी की आत्मा में सहकारिता का वास है। सहकारी बैंकों एवं प्राथमिक कृषि साख समितियों के कार्यों में पारदर्शिता लाकर सहकारी आंदोलन को मजबूत बनायेंगे। प्रदेश के किसानों को आधुनिक बैंकिंग की सुविधा उपलब्ध कराते हुए "आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश" के निर्माण हेतु हरसंभव कार्यवाही करेंगे।
   प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश में भी इस दिशा में तेजी से प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्म-दिवस के उपलक्ष्य में राज्य में 17 से 23 सितम्बर तक मनाये गये गरीब कल्याण सप्ताह अन्तर्गत आयोजित कार्यक्रम में 63 हजार नवीन किसान, पशुपालक, मत्स्य-पालक हितग्राहियों को किसान क्रेडिट-कार्ड प्रदान किये। इन किसानों के लिये राज्य शासन द्वारा 335 करोड़ रुपये की साख सीमा भी स्वीकृत की गई। सहकारी समितियों द्वारा 36 हजार से अधिक किसानों को 122 करोड़ का ऋण वितरण भी किया गया। उन्होंने शून्य प्रतिशत ब्याज पर किसानों को ऋण उपलब्ध कराने के लिये 800 करोड़ रुपये की सहायता भी सहकारी बैंकों को प्रदान की।
   मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के कृषक हितग्राहियों को अतिरिक्त सहायता दिये जाने के लिये मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना शुरू की है। इस योजना में दो किश्तों में 4 हजार रुपये राज्य सरकार द्वारा किसानों को प्रदान किये जायेंगे। इस प्रकार किसानों को प्रतिवर्ष कुल 10 हजार रुपये की राशि प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में प्रदेश के 77 लाख हितग्राही किसान लाभान्वित होंगे।

गरीब के आवेदन कार्यालय में आने पर उनका तत्काल निराकरण किया जाए जो आवेदन टीएल में मार्क है उनका विशेष तौर पर निराकरण किया जाए,इसी प्रकार सीएम हैल्प लाईन, शासन से प्राप्त पत्रों एवं न्यायालयीन प्रकरणों को भी गंभीरता से लेकर सभी अधिकारी निराकरण करें

 

 कलेक्टर श्री संजय कुमार ने आज मंगलवार को न्यू कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में लंबित पत्रों की विभागवार समीक्षा की। उन्होंने समीक्षा के दौरान सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभी तक जिन प्रकरणों पर आपके विभाग द्वारा कार्यवाही नहीं की गई है और वह लंबे समय से लंबित है उन्हें त्वरित गति से निराकरण करें। उन्होंने कहा कि मुझे अगले हफ्ते तक लंबित प्रकरणों में शत प्रतिशत प्रगति चाहिए। यदि प्रकरणों के निपटाने में किसी प्रकार की भी परेशानी आ रही हो तो विभागीय अधिकारी मेरे पास आकर प्रकरणों के संबंध में चर्चा कर सकते है। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि विभागीय अधिकारी प्रकरण निपटाने में लापरवाही वरतते है तो उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी।
   बैठक में कलेक्टर श्री कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शासन की इच्छा है कि किसी भी गरीब के आवेदन कार्यालय में आने पर उनका तत्काल निराकरण किया जाए जो आवेदन टीएल में मार्क है उनका विशेष तौर पर निराकरण किया जाए। इसी प्रकार सीएम हैल्प लाईन, शासन से प्राप्त पत्रों एवं न्यायालयीन प्रकरणों को भी गंभीरता से लेकर सभी अधिकारी निराकरण करें। उन्होंने प्रभारी खाद्य अधिकारी सुश्री शिवांगी जोशी को निर्देश दिए कि नियमित रूप से राशन दुकानों की जांच करें जिससे कालाबाजारी न हो।

मिलावटखोरों के विरुद्ध सख्ती से करें कार्रवाई - स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी

 मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशों पर अगस्त माह से संचालित अभियान में अब तक की कार्रवाई में मिलावटखोरी करने वालों के विरुद्ध 285 प्रकरण दर्ज करवाए गए और 220 प्रकरणों में मिलावटखोरों पर 30 लाख 62 हजार का अर्थ दंड अधिरोपित किया गया है। कुल अधिरोपित अर्थदंड से 15 लाख पाँच हजार की वसूली भी की जा चुकी है। सी. जे. एम. कोर्ट में दर्ज 39 प्रकरण पर भी सुनवाई जारी है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ.प्रभुराम चौधरी ने विभागीय अधिकारियों को अभियान के तहत मिलावटखोरों के विरुद्ध की जा रही कार्यवाही को और अधिक सख्ती से करने के निर्देश दिए है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के नागरिकों को शुद्ध खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए मिलावटखोरों के विरुद्ध अभियान संचालित किया गया है। विभाग द्वारा अभियान के तहत खाद्य पदार्थो में मिलावट करने वालो के विरुद्ध की गई

   मंत्री डॉ. चौधरी ने प्रदेश की जनता को शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने और मिलावटखोरों एवं नकली सामग्री निर्माण एवं विक्रय करने वालों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा हाल ही में सभी संभागों के लिये संभागीय चलित प्रयोगशाला बैन को भोपाल से रवाना किया गया था। यह चलित प्रयोगशाला सुदूर क्षेत्रों में मौके पर पहुँचकर खाद्य पदार्थों के नमूनों का संकलन, जाँच, और खाद्य पदार्थों में मिलावट के संबंध में जन-जागरूकता बढ़ाने का कार्य कर रही हैं। नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने ईट राइट चैलेंज के अंतर्गत शामिल जिलों में लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की संख्या में वृद्धि, क्लीन स्ट्रीट फूड हब, इट राइट स्कूल, ईट राइट कैम्पस और जन जागरूकता के कार्यक्रमों को संचालित करने की गतिविधियाँ भी शामिल की गई है। मिलावटखोरी के विरूद्ध चलाये गये अभियान के दौरान की गई कार्यवाही में 6428 निरीक्षण और जांच के लिए 2941 खाद्य पदार्थो के नमूने लिए गए। राज्य खाद्य चलित प्रयोगशाला से 521, मैजिक बाक्स के माध्यम से 2158 और अन्य स्रोतों से 438 खाद्य पदार्थों के सर्विलेंस नमूने लिए गए। जांच के लिए संकलित 6428 सर्विलेंस नमूनों में राज्य खाद्य प्रयोगशाला द्वारा 3638 नमूनों की जांच रिपोर्ट जारी की गई। खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के विरुद्ध निर्धारित प्रावधानों में धारा 32 के अंतर्गत 484 मिलावटखोरों  को नोटिस जारी किए गए।  
   राज्य खाद्य प्रयोगशाला द्वारा पिछले तीन माह की अवधि में खाद्य पदार्थ के संकलित नमूनों की जांच कर 3638 की रिपोर्ट दी गई। इनमें से 3064 नमूने मानक स्तर के पाए गए और 311 नमूने अमानक स्तर के पाए गए। इसके साथ ही 207 नमूने मिथ्या छाप के पाए गए। कुल संकलित खाद्य पदार्थो के नमूनों में 24 नमूने असुरक्षित प्रकार के पाए गए। धारा 32 के अतिरिक्त अन्य धाराओं में प्रतिबंधित नमूनों की संख्या 32 पाई गई।
   मंत्री डॉ. चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के विरुद्ध शक्ति से अभियान को संचालित कर रही है। खाद्य पदार्थों में किसी भी तरह की मिलावट नहीं हो इसके लिए खाद्य सुरक्षा प्रशासन विभाग का अमला पूरे प्रदेश में खाद्य विभाग, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से कार्यवाही कर रहा है।

कलेक्टर ने धान उपार्जन की समीक्षा समर्थन मूल्य पर 5 हजार मैट्रिक टन धान की हुई खरीदी, सभी उपार्जन केन्द्रों पर धान की खरीदी हो

 शासन द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर दतिया जिले में अभी तक पांच हजार मैट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। जिले में धान की खरीदी हेतु 28 उपार्जन केन्द्र बनाए गए हैं।

    कलेक्टर श्री संजय कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को न्यू कलेक्ट्रेट में आयेाजित धान उपार्जन के संबंध में संबंधित विभागों के अधिकारियों की आयोजित समीक्षा बैठक में दी गई।
    कलेक्टर श्री कुमार ने धान उपार्जन की समीक्षा करते हुए अधिकारियो केा निर्देश दिए कि जिले में धान उपार्जन हेतु बनाए गए सभी केन्द्रों पर धान की खरीदी शुरू हो जाए। किसी भी केन्द्र पर किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी ना हो। उन्हें सभी मूलभूत सुविधाएं भी केन्द्र पर मिले यह सुनिश्चित करें। उन्होनें निर्देश दिए कि केन्द्रों पर उपार्जन के दौरान कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन कर सोशल डिस्टेंसिंग रहे तथा किसान मास्क लगाकर आए। केन्द्रों पर सेनेटाइजर की भी व्यवस्था रखी जाए। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि धान उपार्जन केन्द्रों पर बारदानें की पर्याप्त व्यवस्था हो। इसके लिए राईस मिलों, पीडीएस की दुकानों से संपर्क कर व्यवस्था करें।
   बैठक में जिला विपणन अधिकारी श्री आरएस तिवारी ने बताया कि जिले में 28 उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से 500 किसानों द्वारा औसतन 5 हजार मैट्रिक टन धान बेचा गया है। रूपये 1868 प्रति क्विंटल की दर से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की जा रही है। श्री तिवारी ने बताया कि खरीदी की गई धान का परिवहन 18 नवम्बर से शुरू हो जाएगा। जिसकी व्यवस्थाएं कर ली गई हैं।  

रविवार, 15 नवंबर 2020

भ्रष्ट बिजली कंपनी का स्तरहीन घटिया इन्फ्रारस्ट्रक्चर और निकम्मे तथा भ्रष्ट बिजली अफसरों की अयोग्य और नाकारा टीम की बदौलत चंबल अंधेरे में डूबी , शाम 6 बजे से मुरैना में बिजली गोल

शिकायतों को महज 500 से 800 रूपये लेकर करा दिया जाता है फोर्सली फर्जी तरीके से सी एम हेल्पलाइन में क्लोज

मुरैना, 15 नवम्बर ( ग्वालियर टाइम्स ) मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के चंबल संभाग के वितरण में जो भी क्रम जारी है , उसमें कांग्रेस की कमलनाथ सरकार में हुई अयोग्य व भ्रष्ट अफसरों और फील्ड में बिजली कर्मियों की पदस्थी तो खैर अपने आप में भ्रष्टाचार का एक नायाब नमूना रही है , सी एम हेल्पलाइन की शिकायतों को महज 500 से 800 रूपये लेकर ( हमारी आंखों देखी ) मुरैना कलेक्ट्रेट के गेट स्थित एन आई सी के सेवा केन्द्र से हर शिकायत को फर्जी तरीके से फोर्सली क्लोज कर यह कहा जाता रहा कि (  कोई भी ) शिकायतकर्ता (साले ) को घुमाते रहेंगें एक नंबर से चार नंबर तक ऐसे ही , तुम पैसे दिये जाओ , हम यूं ही क्लोज करते रहेंगें ।

यह वाकया उस वक्त का है जब एक पुलिस शिकायत के संबंध में हम सी एस पी मुरैना को अपना बयान दर्ज कराने गये थे , तब संयोग से सी एस पी मुरैना ने हमें वहां उस कक्ष में भेज दिया था और दो चार घंटे हमने उस कक्ष की कार्यवाही और प्रणाली को खुद अपनी आंखों से देखा , संयोग से कक्ष प्रभारी हमें पहचानता नहीं था सो धड़ल्ले से हमारे सामने ही खेल करता और बताता रहा ।

बिजली कंपनी का भ्रष्टाचार और घटिया इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा अवैध व फोर्सली फर्जी बिल देना तो खैर किसी से छिपा नहीं है , न आम जनता से और न किसी राजनेता से , न न्यायालय से और न किसी भी जांच एजेंसी से । न थ्री फेज सप्लाई है कहीं और न किसी उपभोक्ता के थ्री फेज बिल लगातार भुगतान के बावजूद ही थ्री फेज सप्लाई ही मिल रही है , मटरूआ , करूआ हों या कोई और शराब में 24 घंटे मस्त पड़े बिजली अफसर और बिजली कर्मीयों के शौक और मौज केवल दारू तक ही हो ऐसा नहीं है , औरतखोरी और रिश्वत , भ्रष्टाचार के अलावा मांस , मुर्गा और बकरे के शौकीन , जहां फैक्ट्रियों और उद्योगों को जमकर बिजली चोरी करा कर रोजाना ही कंपनी को अपने बाप का माल समझ कर बेच रहे हैं तो उनके बिजली बिलों को घरेलू आम उपभोक्ताओं पर एडजस्टमेण्ट के नाम और आकलित खपत के नाम पर फर्जी तरीके से लाद देता है और चोरों को साहूकार तथा साहूकारों को चोर बनाता रहता है ।

भ्रष्टाचार और अंधेरगर्दी का आलम ये है कि घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली तो कभी मिलती ही नहीं है और केवल बिल मिलते हैं , जबकि उद्योगों और फैक्ट्रियों के हर महीने के लाखों करोड़ों के बिलों की चोरी करवा कर , एडजस्टमेण्ट के लिये आकलित खपत का फर्जी आंकड़ा बना कर धर दिये जाते हैं ।

बिजली आम आदमी को न तो कमलनाथ की कांग्रेस सरकार दे पाई और वही नतीजा भी हालिया उपचुनाव परिणामों में कमनाथ सरकार ने भोगा भी, और उन्हीं अंधेरगर्द और भ्रष्ट अफसरों तथा बिजली कर्मियों की तैनाती और उनकी अयोग्यता, नाकारा और निकम्मापन और भ्रष्टाचार  अब उपचुनाव होते ही फिर से सिरदर्द बन कर उठा है ।

उपचुनावों से पहले रोजाना की जा रही आठ दस घंटों की अघोषित अंधाधुंध  बिजली कटौती , उपचुनाव और दीवाली गुजरते ही फिर से आज 15 नवम्बर सेफिर से चालू हो गयी है , मुरैना में ( गांधी कालोनी . ग्वालियर टाइम्स के प्रधान कार्यालय के आसपास क्षेत्र की ) आज सुबह 9:30 बजे  बिजली काटने के बाद , शाम 6:15 बजे से बिजली फिर काट दी गयी  जो कि इस समय इस खबर के लिखे और प्रकाशित किये जाने के वक्त तक पूरी तरह बंद है , ग्वालियर टाइम्स के प्रधान कार्यालय पर हालांकि 3 फेज का कनेक्शन सन 1995 से है , और 3 फेज का ही बिजली भुगतान किया जाता रहा है मगर बिजली केवल सिंगल फेज के ही 3 फेज बनाकर दी जाती है अर्थात 3 फेज की केबल को पोल पर तीनों फेजों को एक ही सिंगल फेज से जोड़कर दी जाती है । जिसकी तमाम शिकायतें सी एम हेल्पलाइन में की गईं और पी जी पोर्टल भारत सरकार में की गईं , भ्रष्ट अफसरों ने सी एम हेल्पलाइन की सभी शिकायतें बिना किसी निराकरण के ही फोर्सली उटे सीधे जवाब देकर बंद करवा दीं और पी जी पोर्टल भारत सरकार की किसी भी शिकायत का आज तक जवाब ही नहीं दिया , वहां सभी शिकायतें आज दिनांक तक अनिराकृत और पेंडिंग तथा जवाबहीन हैं । जबकि भारत सरकार द्वारा म. प्र. शासन के प्रमुख सचिव ऊर्जा से तत्समय ही जवाब तलब किया जा चुका है लेकिन आज दिनांक तक किसी शिकायत का जवाब देने की जहमत म.प्र. शासन ने नहीं उठाई जिससे आगे हाई कोर्ट जाने का रास्ता खुले ।

इस भ्रष्टाचार की और निकम्मेपन तथा अयोग्यता की ही देन है कि आज चम्बल अंधेरे में डूबी हुई है ।  

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